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Thursday, 23 March 2017

23 मार्च 2017


कल्चरल रिप्रजेंटेशन एंड पावर ऑफ़ मीडिया पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सगोष्ठी का आयोजन
नई दिल्ली , 23 मार्च 2017  - मीडिया द्वारा कला और संस्कृति पर और गहराई से मनन करने और उसे सही पैकेजिंग में पेश करने से कला-संस्कृति का प्रस्तुतिकरण भी मीडिया के लिए लाभदायक हो सकता है। डिस्कवरी जैसा एक पूरा चैनल यदि लोक संस्कृति पर ऐसे कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकता है, जो दर्शकों को घंटों तक बांधे रहता है और वह लाभ कमा सकताहै, तो अखबारों, पत्रिकाओं तथा अन्य खबरिया चैनलों के लिए भी यह कठिन नहीं होना चाहिए। यह माना जाता है कि टीआरपी के लिए चैनलों का सनसनीखेज होना आवश्यक है, जबकिसच यह है कि आज युवा वर्ग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है, अपनी संस्कृति से जुड़ रहा है। यह बात टेक्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज  में‘"कल्चरल रिप्रजेंटेशन एंड पॉवर ऑफ मीडिया ”विषय पर 28 वें एकदिवसीय राष्ट्रीय सगोष्ठी के दौरान प्रो डॉ श्याम कश्यप ने बतौर मुख्यातिथि  शिरकत कर विद्यार्थियों ,शिक्षको , और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही | कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो (डॉ) श्याम कश्यप (वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व उपनिदेशक, डी एच एम् आई , नार्थ कैंपस दिल्ली यूनिवर्सिटी ) ,श्री राम कैलाश गुप्ता, (चेयरमैन टेक्निया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूसंस), प्रो (डॉ) शिवाजी सरकार (आई आई एम् सी ,दिल्ली) , डॉ अजय कुमार (निदेशक ,टेक्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज) ,श्री एन बी नायर, (एग्जीक्यूटिव एडिटर, इंडियन साइंस जर्नल ), प्रो डॉ अनूप बेनीवाल, (डीन, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मास कम्युनिकेशन ,गुरु गोविन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय दिल्ली ), व कन्वेनर डॉ अभिषेक सिंह  ने दीप प्रज्वलित करके किया।

श्री राम कैलाश गुप्ता, (चेयरमैन टेक्निया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूसंस) ने कहा की जीवन शैली पर प्रभाव डालने वाले तत्वों में संस्कृति की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संबंध मेंसंस्कृति, उपभगों की वस्तुओं के बारे में लोगों की पसंद, शैली, पहचान और उन्हें स्वीकार करने की क्षमता पर सीधा प्रभाव डालती है और जीवन शैली को पूर्णतः भिन्न बना सकती है।इस बीच टेलीविजन सबसे महत्वपूर्ण तत्व के रूप में विभिन्न आयु के लोगों के व्यवहार को बनाता बिगाड़ता है। बहुत से परिवार अपने प्रतिदिन के समय का एक भाग टीवी देख करबिताते हैं और मनोरंजन के साथ ही उसके समाचारों और सूचनाओं से भी लाभ उठाते हैं। इसी प्रकार टीवी श्रंखलाएं भी बहुत से लोगों का मनोरंजन करते हुए उनके रिक्त समय को भरदेती है और उन्हें निरंतर टीवी के सामने बैठने पर बाध्य कर देती हैं।

डॉ अजय कुमार (निदेशक टेक्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज) ने कहा की समकालीन परिवेश में हमारे प्रतिदिन के जीवन चक्र में और लगभग सभी क्षेत्रों में मीडिया का हस्तक्षेप बहुत बढ़ गया है, इसके अनेक कारण हैं।मीडिया के विभिन्न जनसंचार माध्यमों ने हमें सनसनीखेज ख़बरों का आदी बना दिया है। ‘‘इतिहास, कला, संस्कृति, राजनीतिक घटना आदि सभी क्षेत्र में सनसनीखेज तत्व हावी हैं। सनसनीखेज ख़बरें जनता के दिलो-दिमाग परलगातार आक्रमण कर रही हैं।’’

डॉ अनूप बेनीवाल, (डीन, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मास कम्युनिकेशन ,गुरु गोविन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय दिल्ली ), ने कहा कि  लोकतंत्र में मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।इसमें दो मत नही कि भारतवर्ष में आजादी के पश्चात मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थानों को बलशाली बनाने और सत्तारूढ़ दल की स्वेच्छाचारिता पर अंकुश लगाने में सराहनीय भूमिका कानिर्वाह किया है। परंतु इसके उपरांत भी ऐसे क्षेत्र भी हैं जिनमें लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ की भूमिका कहीं संदिग्ध सी या गरिमा के प्रतिकूल सी लगती है। जैसे भारतीय संस्कृति, धर्मऔर इतिहास के विषय में मीडिया अपनी बहुत अच्छी भूमिका नही निभा पाया है। इसी प्रकार रचनात्मक समाचारों की अपेक्षा नकारात्मक समाचारों को मीडिया कहीं अधिक प्रमुखता सेप्रकाशित करता है।
प्रो (डॉ) शिवाजी सरकार (आई आई एम सी ,दिल्ली) ने कहा कि मीडिया की बादशाहत पूरे समाज के सिर चढ़कर बोल रही है। हर आयु वर्ग के लोग इसकी गिरफ्त में हैं। यह लोगों कोहंसाने के साथ रुलाने भी लगी है। अब तो नाबालिग भी इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं, जो समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है।
 श्री एन बी नायर, (एग्जीक्यूटिव एडिटर, इंडियन साइंस जर्नल ) ने कहा कि उपभोग, नए युग के मनुष्य के व्यवहार में सबसे स्पष्ट दिखाई देने वाली वस्तु है और इसके माध्यम सेआज के समाज की सोच को समझा जा सकता है। शैली, चयन पर निर्भर होती है और चयन, सूचनाओं तथा संपर्क की प्रक्रिया के फल पर निर्भर होता है। संचार माध्यम ये सूचनाएंलोगों तक पहुंचाते हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में किसी व्यक्ति के पास क्या विकल्प हैं और वह क्या चयन कर सकता है। वे अपनी इन अर्थपूर्ण सूचनाओं के माध्यम से लोगों की मान्यताओं,सोच, आकांक्षाओं, चयन और व्यवहार और वस्तुतः उनकी जीवन शैली के संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अलबत्ता संचार माध्यमों के संबंध में लोगों का रुझान एकसमान नहींहोता बल्कि संचार माध्यमों से जिसका लगाव जितना अधिक होगा उतना ही उस पर संचार माध्यमों का प्रभाव भी अधिक होगा।
पहले ,दूसरे एवं तृतीय सत्र की अध्यक्षता क्रमशः डॉ मनोज सिंह एसोसिएट प्रो (विवेकानंद इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्रोफेशनल स्टडीज ) एवं डॉ सुरेश चंद्र नायक (मानव रचना यूनिवर्सिटी )  ने किया ।
कार्यक्रम के अंत में  टेक्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज के डीन (एकेडमिक्स), प्रो एम एन झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।  विभिन्न संस्थानों से आये हुए शिक्षक ,विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये | इस मौके पर सभी विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे  |


Sunday, 5 March 2017

नई दिल्ली 3,मार्च 2017

नई दिल्ली 3, मार्च। सुविख्यात सिने अभिनेत्री रामेश्वरी ने मांड़ी स्थित ललिता देवी इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमैंट सांइन्सेस में आज चतुर्थ वार्षिक सांस्कृतिक समारोह ‘‘जील 2017‘‘ का आज हर्षोल्लास के बीच विधिवत् शुभारम्भ किया।दिल्ली एवं एनसीआर के लगभग 75 स े ज्यादा शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओ ं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रतिभाओ ं के साथ शिरकत की। समाराहे को सम्बोधित करते हुए रामेश्वरी ने विद्यार्थीयो में अनुशासन की भावना के साथ उनके प्रतिभा निखार एवं सर्वागिंण विकास पर बल दिया।
इस अवसर पर लिंग्यास शिक्षण समूह के मुख्य पीचेश्वर गड्डे एवं समूह की सचिव श्रीमती सुनिता गड्डे ने मुख्य अतिथि रामेश्वरी का स्वागत किया और छात्र-छात्राओं में पढ़ाई के साथ ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से उनकी प्रतिभा को निखारने पर बल दिया। इस अवसर पर संस्थाके निदेशक प्रो0 एम0 के0 झा ने संस्था की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए इस कार्यक्रम के भव्य आयोजन के लिए अपनी हार्दिक बधाई दी। समाराहे में नृत्य, गायन, नाटक, फैशन शा े एवं कामेडी जैस े कार्यक्रमो ं की प्रतियोगिता आयोजित की गई। समारोह मे अभिनेत्री रामेश्वरी ने संस्था के डा0 दिलीप कुमार द्वारा लिखित ‘‘दूरस्त शिक्षा में संचार के नए माध्यमों का अनुप्रयोग’’ का विमोचन किया। उद्घाटन सत्र में संस्था के बी0 बी0 ए0 विभाग

के अध्यक्ष डा0 प्रणव मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया जबकि धन्यावाद प्रकाश सुमित सेहरावत ने किया। इस अवसर पर संस्था के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्षडा0 भरत कुमार बी0 काम0 के अध्यक्ष डा0 के0 के0 गर्ग, बी0 एड0 की अध्यक्ष डा0 माला दिक्षित एवं वरिष्ठ अध्यापिका डा0 मंजु शर्मा एवं प्रशासनिक अधिकारी विजय पाल आदि ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में अपना योगदान दिया।








धूम- धाम से निकाली गयी शोभा यात्रा







 

श्री गणेश उत्सव आयोजन समिति रोहिणी ,दिल्ली की ओर से इस वर्ष भी गणेशोत्सव पर विशाल शोभा यात्रा निकाली गई जो लगभग 5 से 6किलोमीटर लंबी थी। इस शोभा यात्रा में विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियों, बैण्ड-बाजे, शहनाई, नफीरी, ढोल-ताशे शामिल थे। जहा एक तरफ शोभा यात्रा में भगवान के विभिन्न रूपो को झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया वही दूसरी ओर बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का सन्देश  भी दिया गया

श्री गणेश उत्सव आयोजन समिति रोहिणी ,दिल्ली की ओर से इस वर्ष भी गणेशोत्सव पर विशाल शोभा यात्रा निकाली गई जो लगभग 5 से 6किलोमीटर लंबी थी। इस शोभा यात्रा में विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियों, बैण्ड-बाजे, शहनाई, नफीरी, ढोल-ताशे शामिल थे। जहा एक तरफ शोभा यात्रा में भगवान के विभिन्न रूपो को झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया वही दूसरी ओर बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का सन्देश  भी दिया गया  

      इस कडी में सबसे पहले श्री गणेश उत्सव आयोजन समिति रोहिणी दिल्ली के संस्थापक श्री राम कैलाश गुप्ता ,एन. डी. एम. सी.  के अध्यक्ष करन सिन्ह तवर अन्य संस्था सदस्यों के द्वारा गणेश वंदना की गई शोभा यात्रा की शुरुवात अग्रवाल भवन रोहिणी सैक्टर -8 से हुई जिसे श्री गुप्ता जी ने झंडी दिखाकर रवाना किया। इस यात्रा में टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ अडवांसड स्टडीज के बाइक सवारों का दस्ता सबसे आगे इसके पीछे अष्टावक्र स्कूल ऑफ़ स्पेशल चिलड्रेंस, स्पेशल आर्ट स्कूल, टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टीचर्स ऐजूकेशन, टेक्निया इंटरनैशल स्कूल अष्टावक्र इंस्टीट्यूट ऑफ रिहैबीलिएशन सांइसेस एण्ड रिर्सच की विभिन्न झांकियां थीं। इस झांकी में टेक्निया ग्रुप के सभी संस्थानों के छात्र-छात्रा, शिक्षकगण अन्य सदस्य शामिल हुए। शोभा यात्रा की शुरुवात अग्रवाल भवन रोहिणी सैक्टर -8 से होते हुए, सै.7-8 डिवाईडींग रोड, हिमालय पब्लिक स्कूल, रज़ापूर गांव से निकल कर, रोहिणी स्पोर्टस कॉम्पलेक्स, सैंट मार्गेट पब्लिक स्कूल, प्रशांत विहार, रोहिणी कोर्ट से होती हुई कथा स्थल श्री सिद्धि विनायक मंदिर मधुबन चौक पर आकर समाप्त हुई। शोभा यात्रा का लोगों ने जगह-जगह पर फूल-मालाओं से स्वागत किया और कई भक्तों ने खाने पीने की वस्तुओं को इस यात्रा में शामिल गणेश भक्तों में वितरित किया। कथा स्थल पर शोभा यात्रा के पहुंचने पर श्री गणेश जी की महाआरती की गयी भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। राजनेताओं के अलावा सामाजिक कार्यक्रताओं के साथ-साथ स्कूल कॉलेज के बच्चों का उत्साह भीड़ भी देखते ही बन रही थी। शोभा यात्रा के बाद देर शाम को  श्रद्धालुओं के लिए मटकी फोड़  रंगा रंग कार्यक्रमो का आयोजन किया गया जिसमे टेक्निया ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के छात्रों फ़ौज़िया ग्रुप, बानी ग्रुप और  दिव्या ग्रुप ने अपने ग्रुप डांस से बप्पा  को खुश किया।  उत्सव का समापन  भक्तों ने  गणपति के गीतों पर झूमते हुए किया।  

 

Tuesday, 6 September 2016

दिंनाक 6/09 /2016


 श्री सिद्धिविनायक मन्दिर रोहिणी मे धूमधाम से शुरु हुआ गणेशोत्सव 

 बाल कृष्ण मिश्र :-

श्री गणेश उत्सव आयोजन समिति रोहिणी दिल्ली की ओर से प्रतिवर्ष की भांति इसवर्ष भी गणेशोत्सव का आयोजन बड़ी धूमधाम से शुरु किया गया । पहले दिन ही बप्पा काआर्शिवाद लेने के लिए आम जनों  का तांता लगा रहा |  इस गणेशोत्सव का रोहिणी व दिल्ली केतमाम गणेश भक्तों को साल भर बेस्रबी से इंतजार रहता है। बुद्धि, ज्ञान और विघ्नविनाशक केरूप में पूजे जाने वाले श्री गणेश जी के स्वागत के लिए इस समय उनके भक्तगण पूरी तरह से तैयार हैं। गणेश भक्तों के लिए आयोजन समिति द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों कोआयोजित किया गया  । इसी कड़ी में गणपति की स्थापना के साथ-साथ  रंगारंग कार्यक्रमों की शुरुवात हुई | श्री गणेश उत्सव आयोजन समिति रोहिणी (दिल्ली) के अध्यक्ष  श्री राम कैलाशगुप्ता ने बताया कि भक्तों के लिए समिति गणेशोत्सव के बाकी दिनोंमें भी इसी तरह के औरकार्यक्रम आयोजित करेगी।गणेशोत्सव के पहले दिन टेक्निया इंस्टीट्यूट के पत्रकारिता के छात्रों शैफाली रावत ,फौजिया ने अपने मनमोहक नृत्य से भगवान गणेश की अर्चना की तो वहीं अदनान  ने अपने सुरीले भजन से भक्तजनों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसी तरह सेअष्टावक्र स्कूल ऑफ़ स्पेशल चिलड्रेंस, स्पेशल आर्ट स्कूल, टेक्नियाइंस्टीट्यूट ऑफ़ टीचर्सऐजूकेशन, टेक्निया इंटरनैशल स्कूल के छात्रों की खुबसूरत और मनमोहक प्रस्तुतीयों ने सभीभक्तों का मन मोह लिया। विशेष आकर्षक और मनमोहक समय उस समय आया जब टेक्निया इंटरनेशनल  स्कूल के एक बच्चे ने संस्था के संस्थापक और समाज सेवक श्री राम कैलाश गुप्ता जी को शिक्षक दिवस के रंग में परिपूरित मनमोहक गीत "हम करें गुरु के बंदन " गाकर उनके जन्म दिवस पर एक अनमोल तोहफा दिया | जबकि रोंनी ने अपने नृत्य से लोगो को  मंत्रमुग्ध कर दिया |

Monday, 5 September 2016

दिंनाक 5-09-2016

सियासी बिसात में तार- तार कश्मीर और कश्मीरियत
                                                 -------------हर्षवर्धन पांडेय
 

 कश्मीर में हिंसा का तांडव थमने का नाम नही ले रहा | पिछले  करीब डेढ़ महीने से जन्नत  अशांत है। राज्य में आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच लगातार झड़पों का सिलसिला जारी है | जिस कारण  सरकार को डेढ़ दशक बाद कश्मीर की सड़कों पर जहाँ बी एस एफ को उतारने पर मजबूर होना पड़ा है वहीँ विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीर के हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने के साथ ही सर्वदलीय बैठक का जो दौर शुरू किया उसका अब तक का नतीजा भी सिफर ही रहा है |

 केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह कश्मीर  में शांति बहाली के लिए जहाँ  घाटी का रुख कर चुके हैं वहीँ मुख्यमंत्री महबूबा की पी एम मोदी के साथ बैठक के बाद भी कश्मीर के हालत संभाल नहीं पा रहे हैं | आलम यह है कि अलगाववादियों को महबूबा की कड़ी चेतावनी के बाद भी जन्नत में पत्थरबाजी का दौर थमा नहीं है |  बीते सोमवार को कश्मीर घाटी में कर्फ्यू हटाए जाने के ठीक दो दिन बाद हिंसा के तांडव का खुला खेल फिर से शुरू हो गया है |  सुरक्षा बलों के साथ हुई हिंसक झड़प में एक किशोर की मौत हो गई तथा 100 से अधिक व्यक्ति घायल हो गए | भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और पैलेट गन का इस्तेमाल किया ।  जब भीड़ नहीं हटी तो उन्हें गोली चलानी पड़ी |  बुधवार को एक किशोर की मौत के साथ ही घाटी में नौ जुलाई से शुरू हुए इस संघर्ष में मरने वालों की संख्या अब 72 हो गई है, जिनमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं |  वहीं  हिंसक संघर्ष में अब तक 11,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं जिसमें 7,000 नागरिक और सुरक्षा बलों के 4,000 जवान शामिल हैं |

दरअसल कश्मीर की सियासत इस समूचे दौर में  उस मुहाने पर जा टिकी है जहां भारत सरकार और घाटी  के बीच संवाद पूरी तरह टूटा हुआ है | अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा किसी भी नेता ने कश्मीर के मसले को हल करने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद भी उस लीक का पता लग पाना मुश्किल दिख रहा है क्युकि वह  अलगाववादियों से बात ना करने का एलान पहले ही कर चुकी है  । असल में कश्मीर में  आए दिन सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के बीच अक्सर झड़पें होती रहती हैं | हिज़बुल मुज़ाहिद्दीन के चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद जो कश्मीर में हालात बन रहे हैं, उससे लगता है कि  लोग आक्रोशित हैं  ।

 90 के दशक को याद करें तो उस दौर में मुफ़्ती मुहम्मद सईद की बेटी को अगवा किया गया था तब इतनी बड़ी संख्या में लोग बाहर आए थे | जिसके बाद  1993 में हज़रत बल में चरमपंथी छिपे हुए थे जिसे सेना ने घेरे में लिया तो घाटी सुलग गई | फिर 1995 में एक सूफ़ी संत की दरगाह में एक पाकिस्तानी चरमपंथी के छिपने के बाद फिर से कश्मीर जलने लगा | 2008 में अमरनाथ की ज़मीन के विवाद के वक़्त भी काफ़ी बवाल हुआ था और कई महीनों तक प्रदर्शन हुए जिसकी गूंज दिल्ली तक पहुंची | 2010 में एक कथित एनकाउंटर के बाद भी बवाल हुआ जिसमें क़रीब 130 लोग मारे गए और 2013 में अफ़जल गुरु की फांसी के बाद भी कश्मीर में बवाल हुआ जो कुछ समय बाद थम सा गया | लेकिन  ताजा मामला आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीरी युवाओं के फूटे आक्रोश का है जिसे कश्मीर के युवा किसी आइकन से कम नहीं समझते थे | बुरहान वानी का परिवार जमात विचारधारा से काफी प्रभावित था। बुरहान वानी पाकिस्तानी आतंकी संगठन  हिजबुल मुजाहिदीन का सदस्य था। उस पर एक तरफ जमात का मजहबी असर था तो दूसरी तरफ वह 21वीं सदी का वह युवा था जो सोशल मीडिया  का खुलकर इस्तेमाल करने वालों में से एक था । इन दोनों स्थितियों ने बुरहान को हिजबुल का कमांडर बनने में मदद की। वानी ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर मजहब से प्रेरित अपनी राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा दिया। इसी के आसरे  वह युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय चेहरा बन  गया। जब उसे सेना ने मार गिराया तभी से कश्मीर में हिंसा शुरू हो गई। यह हिंसा अभी भी जारी है।1996 के बाद यहां पहली बार ऐसा हुआ कि किसी चरमपंथी की मौत के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोग कश्मीर की  सड़कों पर बाहर आए हैं | इस विरोध प्रदर्शन से कश्मीर के पर्यटन कारोबार को जहाँ करोड़ों का नुकसान हो गया है वहीँ बीते 53 दिनों से लोगों की रोजी रोटी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है जिसकी सुध लेने की जहमत कोई राजनेता इस दौर में लेने को तैयार नहीं है |  इस दौर में जहाँ दुकानों में ताले पड़े हैं वहीँ निजी और सरकारी शिक्षण संस्थान  और कार्यालयों में पसरा सन्नाटा इस बात की गवाही दे रहा है कि कश्मीर में हालात दिन पर दिन कैसे खराब होते जा रहे हैं और सरकार कुछ कर भी नहीं पा रही है |

बीते दिनों कश्मीर के हालात पर महबूबा और मोदी की मुलाक़ात दिल्ली में हुई थी जिसमे महबूबा ने पीएम मोदी  की तारीफों के कसीदे पढ़ते हुए कहा पी एम मोदी ने कश्मीर के लिए  सभी तरह के जरूरी कदम उठाए हैं। उन्‍होंने याद दिलाया कि पीएम मोदी जब लाहौर से लौटे तो देश को पठानकोट आतंकी हमला झेलना पड़ा।  महबूबा ने कहा कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की आधारशिला वाजेपई की कश्‍मीर नीति थी।  पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई की कश्‍मीर नीति को वहीं से आगे बढ़ाना होगा जहां पर इसे रोक दिया गया | वहीँ कांग्रेस ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाव दिया है कि उन्हें वार्ता की पहल करनी चाहिए। कांग्रेस की यह टिप्पणी तब आई जब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कश्मीर  में  प्रतिनिधिमंडल भेजने की वकालत की।

जानकारों के मुताबिक कश्मीर में हिंसा बढ़ने की एक वजह यह रही कि दक्षिणी कश्मीर के युवा 2010 में हुई हिंसा के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस से काफी नाराज थे। उन्होंने उमर अब्दुल्ला की सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए 2014 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी को वोट दिया। लेकिन पीडीपी और भाजपा के गठबंधन से इन युवाओं ने अपने आपको ठगा हुआ महसूस किया। इसलिए ये युवा सरकार से खुलकर लड़ने लगे हैं जिसकी मिसाल कश्मीर में   दिखाई दे रही है  | बुरहान की मौत ने आग में घी डालने  का काम किया और  जन्नत को सुलगाने   का काम अलगाववादी संगठनों ने किया। उन्होंने कश्मीर  के मुसलमानों को आक्रोशित कर सड़कों पर उतारा। धीरे-धीरे घाटी  सुलगने लगी। मौजूदा दौर में भारत पाक की बातचीत लम्बे समय से बंद है | पी एम मोदी ने बहुत हद तक अपने शपथ ग्रहण समारोह से हमारे पडोसी पाक को सम्बन्ध सुधारने का हर मौका दिया लेकिन पठानकोट के हमले ने सारी उम्मीदों  पर पानी फिर दिया | दूसरा मोदी केंद्र में प्रचंड बहुमत की सरकार चला रहे हैं | पिछली सरकारों के बातचीत के दौर में अलगाववादी नेता अक्सर शामिल हुआ करते रहे हैं लेकिन ऐसा पहला मौका है जब पी डी ऍफ़ और भाजपा सरकार केंद्र राज्य में सत्तासीन होने के बाद भी अलगाववादियों के लिए बातचीत के दरवाजे बंद कर चुकी है जिससे कश्मीर का मुद्दा अधर में लटक गया है | पाक से जब भी बात होती है तो वह कश्मीर पर खुद को भी बातचीत के लिए आमंत्रित करने की बात करता रहा है लेकिन भारत का स्टैंड इस बात पर साफ़ है जब तक पाक आतंक का रास्ता नहीं छोड़ता तब तक उससे किसी तरह की कोई बात नहीं हो सकती इस कशमकस में कश्मीरियत भी उलझ कर रह गयी है  

इधर भारतीय सरकारी एजेंसियों का भी दावा है कि कश्मीर  में चल रहे हिंसक उपद्रव में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों और एसआई का हाथ है। भीड़ में आतंकी शामिल होकर जवानों पर पेट्रोल बम फेंक रहे हैं जिससे तनाव बढ़ रहा है और इस तनाव से पाक कश्मीर का अन्तराष्ट्रीयकरण करने की दिशा में मजबूती के साथ बढ़ने की तैयारी में है |  जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी  कश्मीर में जारी अशांति के बारे में हाल ही में कहा था कि अलगाववादी पाक की शह पर कश्मीर में माहौल को खराब कर रहे हैं। महबूबा ने कहा कि मस्जिदों से लोगों को उकसाने के लिए नापाक पैगाम दिए जा रहे हैं। अलगाववादी सिर्फ अपने स्वार्थ की खातिर ही ऐसा कर रहे हैं। पाक हवाला के जरिए अलगाववादियों को धन दे रहा है जिससे वे गरीब कश्मीरी लोगों विशेषकर युवाओं को उकसा रहे हैं। असल में इस दौर की सबसे बड़ी  मुश्किल यह है कि हर दल कश्मीर के हालात को अपने नजरिये और वोट बैंक की सियासत के अनुरूप देख रहा है | इस गुणा भाग से  राजनेताओ की सियासत बेशक फीकी पड़ने के साथ चमक सकती है  लेकिन इससे समस्या का समाधान होना दूर की गोटी ही लगता है | सियासत ने वास्तव में कभी कश्मीर और कश्मीरियत को गंभीरता से महसूस किया होता तो जन्नत के हालात आज इस कदर  बेकाबू नहीं होते जहाँ 53 दिन लोगों को अपने कमरों की चहारदीवारी में बैठकर नहीं बिताने पडते और उनके सामने दो जून की रोजी रोटी का सवाल भी नहीं घुमड़ता |

देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीरियत इंसानियत और जम्हूरियत में यकीन रखने वाले सभी लोगों को आमंत्रित कर वाजपेयी वाली लीक पर कश्मीर में चलना चाहते हैं |शायद यही वजह है एक दो दिन में कश्मीर में 26 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को भेजने पर गहनता से मंथन चल रहा है | खुद राजनाथ ने अब कश्मीर की कमान अपने हाथ में ली है और वह खुद कश्मीर के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे जिसमे अलगाववादी नेताओ से भी बातचीत का नया चैनल खोलने पर विचार चल रहा है  | यानी कश्मीर जाने वाले प्रतिनिधि दल के लोगों को कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मिलने की छूट होगी। अगर ऐसा होता है तो कुछ रास्ता निकलेगा इस बात की उम्मीद तो बन ही रही है |तो मोदी सरकार के अब कश्मीर पर नरम रुख का इन्तजार हर किसी को है  | देखना होगा ऊट किस करवट कश्मीर पर बैठता है ?